मित्रों जिसकी लाठी उसकी भेंस की कहावत बड़ी ही आम है, किसी जमाने में इस कहावत का उदभव लाठी का प्रयोग कर किसी की भेंस हांक ले जाने के परिणामस्वरूप ही हुआ होगा और कालांतर में लाठी अपने इन्ही गुणों के कारण शक्ति का प्रतिक बन गई, , लाठी अगर हाथ में हो तो अगला आदमी आपसे विनम्र व्यवहार करता है, लाठी सदभावना की प्रतिक है लाठी हाथ में हो तो आपके सभी दुर्गुण भी सदगुणों में परिवर्तित हो जाते हैं, हाथ में लाठी हो तो अगला इन्सान आपको बड़ी श्रद्धा और आत्मीयता से देखता है अगर आप उसे कोई कार्य करने को कहें तो वो फ़ौरन से पेश्तर करता है, लाठी धारकों के आदेश की अवहेलना कोई नहीं कर सकता, लाठी धारक सामर्थ्यवान होता है और इसी कारण वो समस्त दोषों से मुक्त रहता है, तभी तो तुलसीदास जी ने कहा था ''समरथ को नहीं दोष गुसाई'' लाठी हाथ में आते ही किसी भी व्यक्ति में साहस और शक्ति के संचार में आशातीत वृद्धी हो जाती है वह स्वयं को सक्षम और सबल महसूस करने लग जाता है और यही विश्वास आत्मनिर्भरता का प्रतिक है, लाठी हाथ में हो और तेवर जीवन में कुछ कर गुजरने के हो तो किसी भी व्यवसाय को बिना पूंजी के ही तुरंत शुरू किया जा सकता है, मेरे पड़ोस के भीमराज जी के मंजले लड़के ने तो हाथ में लाठी लेकर बनिए की डूबत उगाही का कार्य आरंभ क्या तो इतनी सफलता साथ लगी की कुछ सालों में उनकी स्वयं की फाइनेस कम्पनी खड़ी हो गई, वे इस सफलता का पूरा श्रेय केवल और केवल लाठी को देते हैं,
लाठी धारकों का शुमार मोतबिरों में हो जाता है , वो अघोषित पंच सरपंच हो जाते हैं , लाठी हाथ में हो तो आप असफल नही हो सकते, लाठी हाथ में हो तो कुत्ता भी नहीं काट सकता, लाठी में बहूत गुण हैं, लाठी मानव का पुरातन और बुनियादी हथियार है, लाठी बलवानों, पहलवानों, और लठेतों की शोभा रही हैं जिनकी सामाजिक परिवर्तन में बहूत मुख्य भूमिका रही हैं, गाँधी जी ने भी इन्ही गुणों के कारण ही लाठी को जीवनपर्यंत के लिए अपना हमसफ़र बनाया था, लाठी धारक जन्मजात नेतृत्वकर्ता लगता है,उसके नेतृत्व का सभी लोहा मानते हैं, एक बार की सहारा देने से आपकी ओलादें धोखा दे दे , पर लाठी सहारा देने के मामले में धोखा नहीं दे सकती शायद इसी लिए राजस्थान सरकार ने तो लाठी धारक वृद्धों को भी विकलांग का दर्जा देने की घोषणा की है, इस आदेश के बाद सरकारी लाभ लेने के लिए कई वृद्धजन जो बिना लाठी के भी चलफिर सकते हैं वे लाठियां थाम लेंगे, सरकार का ये आदेश लाठी के बाज़ार में फिर तेजी ले आएगा,
मेने कई लाठी धारकों के पास बड़ी ही सुन्दर लाठिया देखी है, मेरे मिलने वाले एक लाठीधारक अपनी प्रिय लाठी के रखरखाव पर काफी खर्चा करते हैं, वे समय समय पर उसे तेल पिलाते हैं, और उसे कई रेशमी धागों से सजा कर रखते हैं, उन्होंने अपनी लाठी को लोहे के छल्ले भी पहना रखे हैं, उनका कहना है की इससे प्रतिध्वन्धी में सदेव भय व्याप्त रहता है, वो हमेशा इस भय से थर्राया रहता है की कहीं लाठी मेरे सिर को तरबूज की भांति नहीं फोड़ दे, इस कारण वो सदेव लाठी धारक के प्रति श्रद्धा का भाव लिए रहता है, तो मित्रों लाठी के इन गुणों के बारे में जितना लिखा जाये कम है, और में सोच रहा हूँ की एक अदद लाठी में भी खरीद लूँ, पर मेरे मन एक बात और आ रही है लाठी तो 20
-30 रूपये में आ जाएगी पर अभी तक लाठी को चलाने के लिए जिस होंसले की दरकार होती है वो दुकान अभी दुनिया में नहीं खुली है, ये सोच कर मेने लाठी के लाख गुणों के बावजूद भी उसे खरीदने का इरादा त्याग दिया, किसी मित्र में ये क्षमता हो तो इसमें लाभ ही लाभ है,

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