Saturday, February 26, 2011

है देवियों और सज्जनों ...गरीबी कायम रहे ..तभी पुण्य का प्रताप रहेगा

है देवियों और सज्जनों ....

शास्त्रों में वर्णित है की ...

विद्यादान महादान ...अर्थात ..समाज में ...मूर्खों का कायम रहना आवशयक है ताकि इस पुण्य का लाभ अर्जित किया जा सके .

वस्त्रदान महादान ,,,.अर्थात ..समाज में नंगों और फकीरों का कायम रहना आवशयक है ताकि इस पुण्य का लाभ अर्जित किया जा सके .

अन्नदान महादान ,,,.अर्थात ..समाज में भूखों का कायम रहना आवशयक है ताकि इस पुण्य का लाभ अर्जित किया जा सके .

अर्थात ...

गरीबी विद्यमान रहेगी तभी पुण्य का प्रताप रहेगा .. ये चिंता की बात नहीं है ये पुण्य करने का सुअवसर है ..

गरीबी कायम रहे ..

ये हमारे देश की कंगाली ,तंगहाली और गरीबी का ही प्रताप है जिसके कारण सरकार कई प्रकार की योजनाये चला रही है ताकि चपरासी की जेब, बाबु की टेबल की दराज, अफसर की तिजोरी और नेता का लोकर और स्विस बैंक भर सके ..

हमारे ये सभी जनसेवक गरीबों की सेवा करने के लिए रात-दिन प्रयत्नशील हैं ,,इनके अनुपम प्रयासों के कारण ही गरीबी बनी हुई है और इन्हें दरिद्र नारायण की सेवा करने का सुअवसर मिला हुआ है ..

में कभी कभी चिंतित हो उठता हूँ की कभी गरीब नहीं रहे तो इस पुण्य का लाभ केसे अर्जित करेंगे .?

मुझे चिंतित देख हमारे माननीय ने कहा चिंता की बात नहीं हमने इस प्रकार की व्यवस्था कर रखी है गरीबी कभी दूर नहीं होगी.... और जब तक चाँद और सूरज हैं इस पुण्य का लाभ हमें मिलता रहेगा और हमारा इस लोक के साथ साथ परलोक भी सुधरता रहेगा ..

दरिद्र नारायण हमारे देश में बहुताय में पाया जाने वाला जंतु है ,,इस प्रजाति के जंतु अन्य देशों में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नहीं पाए जाते हैं... इसी कारण इसके दर्शन लाभ लेने के लिए विदेशी जातरू भी हमारे देश में समय समय पर आते रहते हैं .. इनकी इतनी भारी संख्या होने का मुख्य कारण यहाँ की इनके कायम रहने वाली अनुकूल आर्थिक और सामाजिक परिस्थतियाँ हैं जो अन्य देशों में पाई नहीं जाती ... इस प्रकार ये जंतु इस विशाल अभ्यारण्य में निडर हो कर विचरण करते हैं ....

विदेशी जातरू भी पुण्य कमाने के लिए दरिद्र नारायण की दान पेटी में चढावा चढाते हैं ....इन दान पेटियों के तालों की चाबियाँ सरकारी पंडो के जिम्मे रहती है

जिस प्रकार भगवान के मंदिर का चढावा खाने से सभी पण्डे गोलमटोल और फुल कर कुप्पे बने रहते हैं और उनके मुखमंडल पर सदेव प्रसन्नता और संतोष के भाव रहते हैं ठीक उसी भांति दरिद्र नारायण का चढावा खाने से यही भाव सरकारी पंडो के मुखमंडल पर रहते हैं ..

हमारे देश के दरिद्र नारायण की ये विशेषता है की वो संकट में भी हँसता रहता है और गरीब होने का दोष सरकार को नहीं देता, वो किस्मत को देता है जो की उसकी फूटी हुई है और जब कभी वो सरकार को उसकी फूटी किस्मत दिखाता है, सरकार उसको रिपेयर करने के असफल प्रयास करती रहती है .. और वो इन असफल प्रयत्नों से ही अभिभूत रहता है की सरकार उनका विकास कर रही है ..

मेने इस बार 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस पर बच्चों में बांटी जाने वाली मिठाई के टोकरे में हलवाई की दुकान पर ही सरकारी पण्डे को मुहँ मारते देखा तब मेरा विश्वास और भी पक्का हो गया की गरीबी कायम रहेगी ताकि सतत रूप से पुण्य अर्जित किया जा सके क्योंकि पुण्य कमाने के आशार्थी सरकारी पण्डे छोटे से छोटा अवसर भी नहीं चुक रहे हैं ..

क्या आप नहीं कमाना चाहेंगे पुण्य के प्रताप का लाभ उठाना ..

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